धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा—हे केशव, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है, इसकी महिमा क्या है और इस व्रत को करने से कौन सा फल प्राप्त होता है? तब भगवान श्रीकृष्ण बोले—हे राजन, इस एकादशी का नाम विजया एकादशी है। यह एकादशी सभी कार्यों में विजय प्रदान करने वाली और शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली मानी जाती है। जो मनुष्य श्रद्धा और नियमपूर्वक इस एकादशी का व्रत करता है, उसे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।
भगवान श्रीकृष्ण ने विजया एकादशी की कथा सुनाते हुए कहा कि यह एकादशी भगवान श्रीराम से भी जुड़ी हुई है। जब श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए समुद्र तट पर पहुँचे, तब समुद्र को पार करने का उपाय समझ में नहीं आ रहा था। उस समय विभीषण ने श्रीराम को फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत करने का परामर्श दिया। भगवान श्रीराम ने माता सीता की प्राप्ति और रावण पर विजय के उद्देश्य से इस एकादशी का विधिपूर्वक व्रत किया।
विजया एकादशी के प्रभाव से समुद्र ने मार्ग दिया, सेतु का निर्माण संभव हुआ और अंततः भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर विजय प्राप्त की। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा—हे युधिष्ठिर, इसी कारण यह एकादशी विजया कहलाती है। यह व्रत असंभव कार्यों को भी संभव बना देता है और साधक को सफलता का मार्ग दिखाता है।
इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण ने विजया एकादशी की पूजन विधि बताई। उन्होंने कहा कि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करने चाहिए। मन को शांत कर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। स्वच्छ स्थान पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित कर दीप प्रज्वलित करना चाहिए।
भगवान को गंगाजल, चंदन, अक्षत, पुष्प और तुलसी दल अर्पित करने चाहिए। श्रद्धा से धूप-दीप दिखाकर विष्णु सहस्रनाम, श्रीहरि स्तोत्र या विजया एकादशी की कथा का पाठ करना चाहिए। दिन भर अन्न का त्याग कर उपवास रखना चाहिए और मन, वचन तथा कर्म से संयम रखते हुए भगवान का स्मरण करना चाहिए। रात्रि में जागरण कर भजन, कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन करना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है।
द्वादशी के दिन प्रातः स्नान कर पुनः भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा देनी चाहिए और फिर स्वयं सात्त्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करना चाहिए। अंत में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा—हे युधिष्ठिर, जो मनुष्य श्रद्धा और नियमपूर्वक विजया एकादशी का व्रत करता है, वह जीवन के सभी संघर्षों में विजयी होता है और अंत में भगवान विष्णु के परमधाम को प्राप्त करता है।
0 comments